
Live Update 9 Dec 2020 5:15 PM
जो सरकार की तरफ से प्रस्ताव आया है उसे हम पूरी तरह से रद्द करते हैं : सिंघु बॉर्डर पर क्रांतिकारी किसान यूनियन के अध्यक्ष दर्शन पाल
नई दिल्ली (दर्शक ऑनलाइन ) ९ दिसंबर २०२० : किसानो का आंदोलन नए कृषि कानूनों के खिलाफ 14 दिनों से जारी है सरकार कानून रद्द करने की मांग को सरासर ख़ारिज कर हम सरकार है हम करेंगे वही कायदा और उसीमे फायदा ऐसी हटधर्म भूमिका में नज़र आ रही है वही किसान बुज़ुर्ग,महिलाये बच्चे जवान ये कानून हमे नहीं चाहिए इसे नष्ट करो ऐसी भूमिका में है तो सवाल ये पैदा होता है की प्रजातंत्र में ऐसा होता है ये है लोकशाही जो देश के किसान चाहते है वो होने नहीं देना और देश की जनताने बहुमत से देश की सत्ता पर बिठाया उस जनता में हमारे किसान भाइयो का भी तो हिस्सा है आज उन्हें ही सरकार प्रताड़ित कर रही है और अब सरकार ही उनकी मांग पूरी करने की बजाये आंदोलन ही करते रहे हम कानून पीछे नहीं लेंगे क्या ये सही है किसानो के प्रति कुछ संवेदना सरकार के पास है की नहीं ऐसे अनेक प्रश्न देशवासियो में उतपन्न हो रहे है
मंगलवार की रात हुई बैठक विफल रहने के बाद सरकार और किसान यूनियनों के बीच आज होने वाली बैठक अब नहीं होगी। सरकार ने किसानों को कृषि कानून में संशोधन का लिखित प्रस्ताव भेजा है। जिस पर किसान नेता सिंघु बॉर्डर पर बैठक कर रहे हैं। यह सरकार के प्रस्ताव से राजी हैं या नहीं यह किसान नेताओं की प्रेस कॉन्फ्रेंस में सामने आएगा।
किसान नेता कृषि कानून को पूरी तरह से खत्म करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के साथ बैठक में केंद्र सरकार ने इसपर इनकार कर दिया था और बातचीत अटक गई थी। अब केंद्र ने नए सिरे से प्रस्ताव किसानों के पास भेजा है। कुछ देर में किसान यूनियंस की बैठक होगी और इसपर चर्चा की जाएगी। देखना होगा कि किसान नेता सरकार के प्रस्ताव को मानते हैं या फिर आंदोलन जारी रहेगा।सिंधु बॉर्डर पर मौजूद किसान नेताओं को सरकार की तरफ से मसौदा मिला। इस मसौदे में क्या क्या है अभी यह पता नहीं चला है। किसान अब इस पर विचार कर अपनी आगे की रणनीति तय करेंगे।
राकेश टिकैत ने सरकार के लिखित प्रस्ताव मिलने की बात पूछे जाने पर कहा है कि हमारी बैठक में हम अपनी रणनीति तय करेंगे और सरकार के प्रस्ताव पर भी विमर्श करेंगे। किसान वापस नहीं जाएंगे, ये उनके सम्मान की बात है। क्या सरकार कानून वापस नहीं लेगी? क्या ये अत्याचार होता रहेगा? अगर सरकार जिद्दी है तो किसान भी हैं। ये कानून वापस लेना ही पड़ेगा।







