
ये रात जैसे दुल्हन बन गयी चरागो से कर लुंगा ऊजाला मै दिल के दागो से. आज की रात मेरे दिल की सलामी ले ले.! कल तेरी बज़्म से दिवाना चला जायेंगा. शम्मा रह जायेंगी परवाना चला जायेंगा.! तेरी महफिल तेरे जल्वे हो मुबारक तुझको.तेरी ऊल्फत से नही आज भी ईन्कार मुझे.! तेरा मयखाना सलामत रहे ऐ जाने वफा.! मुस्कुराकर तु ज़रा देखले एकबार मुझे.! फिर तेरे प्यार का मस्ताना चला जायेंगा.! मैने चाहा के बतादुं मै हकिकत अपनी.! तुने लेकीन न मेरा राज़े मोहब्बत समझा.! मेरी ऊल्झन मेरे हालात यहाँ तक पहूंचे.! तेरी ऑंखों ने मेरे प्यार को नफरत समझा.! अब तेरी राह से बेगाना चला जायेंगा.! तु मेरा साथ ना दे राहे मोहब्बत मे सनम.! चलते चलते मै किसी राह पे मुड जाऊंगा. कहंकशां चांद सितारे तेरे चुमेंगे कदम.! तेरे रास्ते कि मै एक धुल हुं ऊड जाऊंगा साथ मेरे, मेरा अफसाना चला जायेंगा
शब्दांचा अर्थ
शम्मा = ज्योत
बेगाना = जो अपना न हो। ग़ैर ; पराया ;
परवाना = लाक्षणिक अर्थ में, वह व्यक्ति जो किसी पर अत्यन्त मुग्ध हो
बज़्म= संमेलन, सभा।
मयखाना = मधुशाला
ऊल्फत=आपुलकी,प्यार, प्रेम
अफ़साना = उपन्यास,कहानी।
कहकशाँ = आकाशगंगा
मस्ताना=प्रसन्न

