
भारतीय सेना ने कहा कि भारत और चीन के बीच सोमवार को हुई कॉर्प्स कमांडर स्तर की वार्ता सौहार्दपूर्ण, सकारात्मक और रचनात्मक वातावरण में हुई। दोनों पक्षों के बीच हुई सैन्य कमांडर स्तर की वार्ता के बाद चीन के तेवर नरम पड़ गए हैं। बैठक में पूर्वी लद्दाख में सभी संघर्ष क्षेत्रों से सेनाओं के पीछे हटने के तौर-तरीकों पर चर्चा की गई और दोनों ही पक्ष इसपर अमल करेंगे।

सोमवार को मोल्डो में दोनों पक्षों के बीच करीब 11 घंटे तक सैन्य कमांडर स्तर की बातचीत हुई थी। भारत ने अडिग रहते हुए दो टूक कहा था कि गलवां, पेंगोंग त्सो और हॉट स्प्रिंग पर जब तक दो मई से पहले वाली स्थिति बहाल नहीं हो जाती पूरी वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर हालात नाजुक बने रहेंगे।15 जून की रात को दोनों पक्षों के बीच हिंसक झड़प हुई थी जिसमें 20 भारतीय जवान शहीद हो गए थे। झड़प के बाद से ही एशिया के दो सबसे बड़े मुल्कों के बीच तनाव चरम पर पहुंच गया। अमेरिकी खुफिया रिपोर्ट में बताया गया कि दोनों पक्षों के बीच हुई हिंसक झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए, जबकि 35 चीनी सैनिक मारे गए। इसके अलावा दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के कई जवानों को हिरासत में लिया, लेकिन उन्हें बाद में छोड़ दिया गया।

सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे लद्दाख पहुंचे
चीन के साथ तनाव के बीच मंगलवार को सेना प्रमुख जनरल एमएम नरवणे लद्दाख पहुंचे। वह सबसे पहले लेह स्थित सैनिक अस्पताल पहुंचे जहां घायल जवानों का इलाज चल रहा है। उनका यह दौरा दो दिन का है।

दिल्ली में सैन्य कमांडरों के कॉन्फ्रेंस में भाग लेने के बाद वह लेह के लिए रवाना हुए थे। वह लद्दाख में उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल वाई के जोशी के साथ जमीन और परिचालन संबंधी तैयारियों की समीक्षा करेंगे। इसके अलावा सेना प्रमुख ग्राउंड कमांडरों के साथ गतिरोध पर चर्चा करेंगे और फॉरवर्ड स्थानों का भी दौरा करेंगे

