हिंदी गीतांमध्ये ऊर्दू काव्य !     

        चित्रपट=पारसमनी 

 वो जब याद आये बहोत याद आये ग़मे ज़िंदगी के अंधेरे मे हमने

चिरागे महोब्बत जलाये बुझाये वो जब याद आये बहोत याद आये

आहटे जाग ऊठी रास्ते हस दिऐ थामकर दिल ऊठे हम किसी के लिए

कई बार ऐसा भी धोका हुवा है चले आरहे है वो नज़रे झुकाये

वो जब याद आये बहोत याद आये

दिल सुलगने लगा अश्क बहने लगे जाने क्या क्या हमे लोग कहने लगे

मगर रोते रोते हसी आगई है ख्यालो मे आकर वो जब मुस्कूराये

वो जब याद आये बहोत याद आये

वो जुदा क्या हुवे ज़िंदगी खो गई शम्मा जलती रही

रौशनी खो गई बहोत कोशीशे की मगर दिल ना बहला

कई साज़ छेडे कई गीत गाए वो जब याद आये बहोत याद आये

शब्दांचा अर्थ

चिराग़ = दीपक, दीया।

अश्क = अश्रू

शम्मा = ज्योत

आहट = चाहुल

साज़ = संगीत

रौशनी = चमक, प्रकाश

Courtesy Bollywood Classics

चित्रपट= पारसमनी (१९६३)

गीतकार=असद भोपाली

संगीत = लक्ष्मीकांत प्यारेलाल (या जोडीचा पहिला चित्रपट)

गायक=मो.रफी व लता मंगेशकर

चित्रित=महिपाल व गितांजली           

संकलन शेख मो.ईदरीस मो.शफी   अध्यक्ष. जे.यु.सी. संगमनेर