
जी हां, इंदौर के लोगों की दिन की शुरुआत ही पोहे से होती है. अगर सुबह-सुबह के नाश्ते में यह मिल जाए तो दिन का बनना तो लाज़मी है. इंदौर में सुबह 6 बजे से ही लोग पोहे की दुकानों पर टूट पड़ते हैं. सुबह के नाश्ते में इंदौर के ज्यादातर घरों में पोहा बनता है. तो वहीं ज्यादातर दुकानों पर पोहा दोपहर के 12 बजे तक बिकता रहता है.इतना ही नहीं, इंदौर में पोहे को लेकर लोगों की इतनी दीवानगी है कि लोग यहां पर रात में भी पोहा खाने चले आते हैं. दरअसल, इंदौर के सरवटे बस स्टैंड की चाय और पोहा बहुत मशहूर है. खास बात यह कि यह रात में भी मिलता है. जिसे लोग बड़े चाव से खाते हैं और पसंद भी करते हैं.

पोहा चटपटा और एक हेल्दी नाश्ता होता है. आमतोर पर लोग इसे नॉर्मल सब्जी की तरह बघार कर बनाते हैं. लेकिन इंदौर में इसे एक अलग ही ढंग से बनाया जाता है. पोहे को दो-तीन बार पानी से धोकर इसमें हल्दी डालकर कुछ देर के लिए छोड़ दिया जाता है (पानी में भिंगो दिया जाता है). फिर इसमें राई, करी पत्ता, मूंगफली के दाने और हल्की मिर्च का बघार तैयार किया जाता है, फिर गले हुए पोहे में इसे मिलाकर इसे पानी से भरे तसले के ऊपर रख कर पकाया जाता है.

पोहा पानी की भाप में गर्म होने के साथ-साथ पकता भी है. फिर इसमें ऊपर से दो तरह की सेव डाली जाती है. एक तो मोटी जो कि तीखी सेव होती है, मोटी सेव के साथ इसमें तीखी बूंदी भी डाली जाती है. दूसरी सेव बारीक होती है और इसमें मिर्च नहीं होती. साथ ही इसमें बारीक कटा हुआ प्याज, हरा धनिया, नींबू का रस, अनार के दाने और ऊपर से जीरावन छिड़कर साथ में गरमा-गरम जलेबी के साथ खाया जाता है. ये सब देख, पढ़ और लिखकर तो हर किसी के मुंह में पानी आना लाज़मी है. तो ये है ना बाकी जगहों से अलग. बस यही इसे अलग बनाता है, और फिर हर शहर का अपना-अपना स्वाद भी तो होता है
