ठाणे : डॉ नरेंद्र दाभोलकर की हत्या में इस्तेमाल पिस्तौल बरामद होने की बात सामने आई है। कहा जा रहा है कि नॉर्वे के गोताखोरों ने पिस्तौल ठाणे की एक खाड़ी से निकाली। जांच के लिए इसे फॉरेंसिक लैब भेजा गया है। डॉ दाभोलकर की अगस्त 2013 में 2 अज्ञात हमलावरों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। सीबीआई के सूत्रों का कहना है कि हत्या के करीब साढ़े सात साल बाद बरामद हुई इस पिस्तौल को तलाशने में करीब 7 करोड़ 50 लाख रुपए खर्च हुए। हालांकि, मामले की जांच कर रही सीबीआई ने अब तक इसकी पिस्तौल बरामद होने की पुष्टि नहीं की है।
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सीबीआई को अगस्त 2019 में पुणे की शिवाजीनगर कोर्ट से ठाणे की खाड़ी में हथियार तलाशने की मंजूरी मिली थी। इसके बाद नॉर्वे के गोताखोरों को इसकी खोज में लगाया गया। हथियार ढूंढने के लिए दुबई स्थित एनविटेक मरीन कंसल्टेंट्स ने नार्वे से अपनी मशीनरी पहुंचाई। हिंदुस्तान टाइम्स ने सीबीआई अधिकारी के हवाले से बताया कि ठाणे की खाड़ी में कई दिनों तक तलाश करने के बाद एक पिस्तौल मिली। बैलिस्टिक्स विशेषज्ञ अब दाभोलकर की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में बताए गए बुलेट के आकार और प्रकार के आधार पर जांच करेंगे कि क्या इसी पिस्तौल का हत्या में इस्तेमाल हुआ था।

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गोताखोरों ने खाड़ी से पिस्तौल की तलाश के लिए चुंबकीय स्लेज का इस्तेमाल किया। केंद्रीय एजेंसी ने पूरे ऑपरेशन की व्यवस्था की। इसमें राज्य सरकार से अनुमति प्राप्त करने से लेकर पर्यावरण की मंजूरी हासिल करने तक की व्यवस्था थी। यहां तक ​​कि नॉर्वे से मशीनरी लाने के लिए लगभग 95 लाख के सीमा शुल्क की छूट भी मिली। सीबीआई अधिकारी ने बताया कि पिस्तौल की तलाश में करीब 7.5 करोड़ रुपए खर्च हुए।