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लखनऊ : डॉक्टर कफ़ील के भाई अदील अहमद बताते हैं कि उनकी गिरफ़्तारी और एनएसए की कार्रवाई के ख़िलाफ़ इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाख़िल की गई है लेकिन अब तक उन्हें ज़मानत नहीं मिल सकी है.

अदील अहमद बताते हैं कि हाईकोर्ट में ज़मानत पर सुनवाई अब तक 11 बार टल चुकी है. इलाहाबाद हाईकोर्ट में डॉक्टर कफ़ील की ज़मानत पर सुनवाई अब 27 जुलाई को होगी.पिछले साल दिसंबर महीने में नागरिकता संशोधन कानून यानी सीएए के ख़िलाफ़ डॉक्टर कफ़ील ख़ान ने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय में कथित तौर पर भड़काऊ भाषण दिया था. इस मामले में कफ़ील के ख़िलाफ़ अलीगढ़ के सिविल लाइंस थाने में केस दर्ज किया गया था. 29 जनवरी को यूपी एसटीएफ़ ने उन्हें मुंबई से गिरफ़्तार किया था.

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मथुरा जेल में बंद डॉक्टर कफ़ील को 10 फ़रवरी को ज़मानत मिल गई लेकिन तीन दिन तक जेल से उनकी रिहाई नहीं हो सकी

मथुरा जेल में बंद डॉक्टर कफ़ील को 10 फ़रवरी को ज़मानत मिल गई लेकिन तीन दिन तक जेल से उनकी रिहाई नहीं हो सकी और इस दौरान अलीगढ़ ज़िला प्रशासन ने उन पर राष्ट्रीय सुरक्षा क़ानून लगा दिया.यूपी एसटीएफ़ डॉक्टर कफ़ील को अब तक दो बार गिरफ़्तार कर चुकी है. यूपी एसटीएफ़ के आईजी अमिताभ यश ने बीबीसी को बताया, “कफ़ील के ख़िलाफ़ अलीगढ़ में मामला दर्ज था और वो वांछित अपराधी थे. उन्हें हमने मुंबई से गिरफ़्तार करके अलीगढ़ पुलिस को सौंप दिया था. इससे पहले उन्हें गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कॉलेज मामले में भी एसटीएफ़ गिरफ़्तार कर चुकी है.”

Dr Kafeel Khan

कोर्ट का आदेश है कि ज़मानत मिलने के बाद रासुका नहीं लगाई जा सकती है

लेकिन सबसे बड़ा सवाल है कि कोर्ट से ज़मानत मिलने के बावजूद कफ़ील ख़ान की रिहाई में तीन दिन का वक़्त कैसे लग गया और ज़मानत के बाद भी उन पर रासुका कैसे लगा दिया गया.कफ़ील के परिजन सुप्रीम कोर्ट का हवाला देकर आरोप लगाते हैं कि राज्य सरकार के इशारे पर यह कार्रवाई हुई है जबकि कोर्ट का आदेश है कि ज़मानत मिलने के बाद रासुका नहीं लगाई जा सकती है.

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कफ़ील के भाई अदील ख़ान कहते हैं, “दस फ़रवरी को शाम चार बजे कोर्ट ने कफ़ील ख़ान को तत्काल रिहा करने के निर्देश दिए थे लेकिन कोर्ट के आदेश के बाद भी रिहा नहीं किया गया. ज़मानत के बाद रासुका तामील नहीं की जा सकती, ये सुप्रीम कोर्ट का फ़ैसला है.””डॉक्टर कफ़ील के ख़िलाफ़ जो भी मामले हैं, सभी में उनको ज़मानत मिल चुकी है. फिर भी रासुका कैसे लगा दिया गया, समझ से परे है.”

(Courtesy समीरात्मज मिश्र लखनऊ से, बीबीसी हिंदी )

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